Thursday, October 22, 2026

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नियमों को ताक पर रखकर बनी ‘नंदविजय फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ को ठेका न दे CCI: जनहित याचिकाकर्ता मोहब्बत खान की मांग

नियमों को ताक पर रखकर बनी ‘नंदविजय फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ को ठेका न दे CCI: जनहित याचिकाकर्ता मोहब्बत खान की मांग

​अवैध फैक्ट्री को ठेका देना जनसुरक्षा और जनहित के साथ खिलवाड़: आरटीआई कार्यकर्ता का कड़ा रुख

​सीलिंग कानून का उल्लंघन, बिना टाउन प्लानिंग की मंजूरी और बिना फायर सेफ्टी के चल रही फैक्ट्री ‘टाइम बम’ के समान

​बॉम्बे हाई कोर्ट में पीआईएल प्रलंबित; अकोला सीसीआई के शाखा प्रबंधक को भेजा कानूनी नोटिस

कोरपना (चंद्रपुर):

भारतीय कपास निगम (CCI) जैसी प्रतिष्ठित ‘मिनी रत्न’ सरकारी कंपनी द्वारा नियमों और कानूनों का उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों को बढ़ावा देना जनहित और जनसुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है। चंद्रपुर जिले के कोरपना तालुका के अंतर्गत मौजा चन्नाई (खुर्द) में नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की गई नंदविजय फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी को आगामी कपास सीजन 2026-27 के लिए गिनिंग और प्रेसिंग (G&P) कार्य का ठेका (एम्पैनलमेंट) किसी भी परिस्थिति में न दिया जाए।

​यह मांग बॉम्बे हाई कोर्ट (नागपुर बेंच) में प्रलंबित जनहित याचिका (PIL) क्रमांक 12/2026 के याचिकाकर्ता, क्षेत्र के प्रसिद्ध सामाजिक व आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता मोहब्बत खान सत्तार खान ने की है। इस संबंध में उन्होंने अकोला स्थित भारतीय कपास निगम के शाखा प्रबंधक को एक विस्तृत और कड़ा कानूनी नोटिस (आपत्ति पत्र) भेजकर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है।

​🔍 आरटीआई और जांच में खुले अवैध निर्माण के 5 गंभीर राज

​याचिकाकर्ता मोहब्बत खान द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जुटाई गई जानकारी और विभिन्न सरकारी विभागों की जांच रिपोर्ट में ‘नंदविजय फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:

​जमीन का अवैध रूपांतरण (सीलिंग कानून का उल्लंघन): जिस सर्वे नंबर 8/1 और 8/2 (मौजा चन्नाई खुर्द) पर यह फैक्ट्री बनी है, वह मूल रूप से ‘भूमिहीन लाभार्थियों’ के लिए महाराष्ट्र कृषि भूमि (सीलिंग) अधिनियम 1961 के तहत आवंटित ‘क्लास-2’ (अहस्तांतरणीय) कृषि भूमि है। राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर इसे ‘क्लास-1’ दर्शाया गया था, जिसे तहसीलदार कोरपना ने अपने आदेश (दिनांक 28.08.2025) में अवैध पाते हुए पुनः ‘क्लास-2’ घोषित कर दिया है। इस जमीन पर कोई भी औद्योगिक गतिविधि पूरी तरह गैर-कानूनी है।

​टाउन प्लानिंग की कोई अनुमति नहीं: चंद्रपुर के सहायक निदेशक, नगर रचना (Town Planning) विभाग ने आरटीआई में स्पष्ट किया है कि इस विशाल औद्योगिक निर्माण के लिए कोई भी स्वीकृत बिल्डिंग प्लान या चेंज ऑफ जोन (NA) की अनुमति उपलब्ध नहीं है। यह निर्माण 100% अनधिकृत है।

​मजूदूर सुरक्षा कानूनों की धज्जियां: सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय के अनुसार, यह फैक्ट्री ‘फैक्ट्री अधिनियम 1948’ के तहत पंजीकृत ही नहीं है। यहाँ न तो न्यूनतम वेतन का कोई रिकॉर्ड है और न ही मजदूरों की सुरक्षा के कोई इंतजाम, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

​अवैध खनन और पर्यावरण को नुकसान: फैक्ट्री निर्माण के लिए बिना अनुमति के मुरुम और रेत का अवैध उत्खनन किया गया, जिसके लिए राजस्व विभाग ने जुर्माना भी लगाया था। लेकिन नियमों के मुताबिक इस पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए था।

​सहकारी उपनिबंधक की मुहर: चंद्रपुर के सहकारी संस्था उपनिबंधक ने भी लिखित रूप में स्वीकारा है कि यह इकाई ‘सरकारी क्लास-2 जमीन पर’ स्थित है और पूरी तरह ‘अवैध’ है।

​⚠️ “सुरक्षा के लिहाज से ‘टाइम बम’ है यह अवैध फैक्ट्री”

​याचिकाकर्ता मोहब्बत खान ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह फैक्ट्री प्राकृतिक नाले के किनारे बाढ़ संभावित क्षेत्र में स्थित है। बिना किसी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी (ढांचागत मजबूती) प्रमाणपत्र और सुरक्षा मानकों के यहाँ भारी बिजली से चलने वाली मशीनें और अत्यधिक ज्वलनशील कपास का भंडारण किया जा रहा है। यह स्थिति किसी भी दिन बड़े हादसे (आग या बिजली करंट) को न्योता दे सकती है। पूर्व में भी यहाँ का शेड गिरने की दुर्घटना हो चुकी है।

​📋 सीसीआई (CCI) से की गई मुख्य मांगें:

​आवेदन तुरंत खारिज हो: गैर-कानूनी रूप से संचालित नंदविजय फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के आवेदन को एम्पैनलमेंट प्रक्रिया के प्रारंभिक स्तर पर ही बाहर किया जाए।

​फर्म को ब्लैकलिस्ट करें: सरकारी खजाने और नियमों को धोखा देने के प्रयास के लिए इस फर्म को भविष्य के सभी टेंडरों के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए।

​सभी आवेदकों की स्क्रूटनी हो: कपास सीजन 2026-27 के लिए आवेदन करने वाली अन्य सभी फैक्ट्रियों के कानूनी दस्तावेजों की भी कड़ी जांच की जाए ताकि कोई अन्य अवैध इकाई सरकारी काम न पा सके।

​💬 याचिकाकर्ता का कड़ा रुख:

​”भारतीय कपास निगम एक सरकारी उपक्रम (Mini Ratna) है। इसे कानून का पालन करने वाली कंपनियों के साथ ही काम करना चाहिए। एक ऐसी फैक्ट्री जो बिना किसी कानूनी अनुमति, बिना टाउन प्लानिंग की मंजूरी और सीलिंग एक्ट का उल्लंघन करके खड़ी की गई है, उसे सरकारी संरक्षण या ठेका देना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और जनहित के साथ धोखाधड़ी है। यदि इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो कोर्ट के माध्यम से सख्त कदम उठाए जाएंगे।”

​— मोहब्बत खान सत्तार खान (याचिकाकर्ता व सामाजिक कार्यकर्ता, कोरपना)

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